मवाना (मेरठ): मवाना के मधुबन बैंक्वेट हॉल में रविवार को आयोजित समाजवादी पार्टी की हस्तिनापुर विधानसभा समीक्षा बैठक एवं 'पीडीए' (PDA) चर्चा कार्यक्रम हंगामे की भेंट चढ़ गया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर बैठने की जगह न मिलने और संबोधन का मौका न दिए जाने से खफा एक सेक्टर प्रभारी द्वारा किए गए हंगामे के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद फहद की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूदगी में यह बैठक चल रही थी। बताया जा रहा है कि मंच पर जगह सीमित होने के कारण कई प्रमुख पदाधिकारियों को नीचे बैठना पड़ा था। इसी दौरान सेक्टर प्रभारी सतपाल यादव का नाम वक्ताओं की सूची में न आने से वे आपा खो बैठे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सतपाल यादव सीधे मंच के सामने पहुंच गए और पार्टी नेताओं पर अपनी नाराजगी उतारते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इस अचानक हुए घटनाक्रम से कार्यक्रम में अफरा-तफरी मच गई और कुछ समय के लिए मंच संचालन पूरी तरह बाधित रहा। बाद में वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप और काफी मान-मनौव्वल के बाद मामला शांत हुआ और कार्यक्रम को पुनः सुचारू किया गया।
बूथ मजबूती पर जोर और पार्टी की रणनीति
हंगामा शांत होने के बाद बैठक अपने मुख्य एजेंडे पर लौटी। पूर्व विधायक योगेश वर्मा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए बूथ स्तर तक संगठन को अभेद्य बनाना अनिवार्य है।
मुख्य अतिथि मोहम्मद फहद ने कहा, "समाजवादी पार्टी निरंतर रोजगार, सामाजिक न्याय और विकास जैसे जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रही है। अब समय है कि कार्यकर्ता पार्टी की नीतियों को हर गांव और हर घर तक पहुंचाएं।"
प्रमुख नेताओं की उपस्थिति
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गुम्मी, पूर्व विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि, प्रदेश सचिव हरि भूषण खटीक राजेंद्र सिंह कश्यप, और पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश सचिव बनारसी दास कश्यप किशोर वाल्मीकि हिमांशु सिद्धार्थ दीपक गिरी समेत पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक के अंतिम चरण में सभी सेक्टर और बूथ प्रभारियों को संगठन को सुदृढ़ करने और आगामी विधानसभा चुनाव की चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए गए।
पार्टी की अनुशासन पर उठे सवाल
हालांकि बैठक का समापन शांतिपूर्वक हुआ, लेकिन मंच पर हुई नोकझोंक और अनुशासनहीनता की घटना ने पार्टी की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इस घटना की चर्चा जोरों पर है और कार्यकर्ता अब इसे अनुशासन से जोड़कर देख रहे हैं।