परीक्षितगढ़ सीएचसी में फार्मासिस्ट एवं आईआईएमटी कॉलेज से एएनएम प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को सीएचसी प्रभारी डॉ रवि शंकर शर्मा मरीजों के बेहतर उपचार के साथ मानवीय व्यवहार का महत्व समझाते हुए। मानवता का पाठ भी पढ़ाया और कहा मरीज अस्पताल में केवल दवा लेने नहीं, बल्कि सहानुभूति और विश्वास की उम्मीद लेकर भी आते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों का कर्तव्य है कि वे हर मरीज से विनम्रता और सम्मान के साथ पेश आएं। मरीजों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें, उन्हें सही जानकारी दें और समय पर उपचार उपलब्ध कराएं। उन्होंने बताया कि सेवा भाव, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी ही एक अच्छे स्वास्थ्य कर्मी की पहचान होती है। कोट सफेद है इरादे भी सफेद रखो" सोमवार का दिन सीएचसी परीक्षितगढ़ के लिए इतिहास बन गया। आज यहां स्टेथोस्कोप नहीं टंगे, यहां इंसानियत टंगी। फार्मासिस्ट और एएनएम की ट्रेनिंग क्लास थी, पर क्लास से ज्यादा ये 'सेवक दीक्षा' बन गई। सीएचसी प्रभारी डॉ रवि शंकर जब बोले तो लगा जैसे फिल्म का हीरो क्लाइमेक्स में आ गया हो। उनका हर शब्द तीर की तरह लगा और सीधा दिल में उतर गया। तुम्हारे हाथ में जो पर्ची है वो कागज नहीं है। वो किसी मां की उम्मीद है। जो टीका तुम लगा रहे हो वो इंजेक्शन नहीं, किसी घर का चिराग है। अगर ये एहसास दिल में उतर गया, तो समझो तुम एक अच्छे स्वास्थ्य कर्मी अधिकारी बन गए। सीएचसी प्रभारी के 3 मंत्र 1 कुर्सी पर नहीं, दिल पर बैठो। मरीज काउंटर पर खड़ा है तो उसे फाइल मत समझो। वो थका हुआ इंसान है।जो इज्जत देगा, वही इज्जत पाएगा। 2 जुबान में जहर नहीं, मरहम रखो। मरीज 10 बार पूछे तो 10 बार हंसकर मरीज का उपचार के साथ दवा खाने का तरीका शिष्टाचार के साथ समझाएं तुम्हारी एक मीठी बात उसकी आदि बीमारी ठीक कर देगी। 3 टाइम की पाबंदी, सेवा की बंदगी। 8 बजे ओपीडी खुले तो 7:55 पर तुम कुर्सी पर हो। तुम मरीज का इंतजार मत कराओ समय पर सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है। प्रभारी ने जाते-जाते सबसे आखिरी लाइन कही और सबके रोंगटे खड़े कर दिए। जब कोई मरीज उपचार कराने तुम्हारे पास आएं उसकी सेवा करने का मौका है यह बार-बार नहीं मिलता। इस मौके को हाथ से मत जाने देना। कसम है इस सफेद कोट की।