लखनऊ, 3 जुलाई। पावर कारपोरेशन ने देर रात बिलिंग सॉफ्टवेयर में लगभग 47 लाख विद्युत उपभोक्ताओं के विद्युत भार को बढ़ा दिया उनका तर्क है कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा टैरिफ आदेश में व्यवस्था दी गई है की एक वित्तीय वर्ष में किसी भी विद्युत उपभोक्ता का यदि तीन बार भार बढ़ेगा तो अगले वित्तीय वर्ष में उसका भार बढ़ाया जाएगा लेकिन पावर कारपोरेशन को यह नहीं पता कि उसमें यह भी लिखा है की विद्युत उपभोक्ताओं को विस्तृत सूचना से अवगत कराना भी होगा साथ ही कई और भी गंभीर मामले हैं जिसे पावर कारपोरेशन ने नजरअंदाज किया जो एक गंभीर मामला है केवल राजस्व बढ़ाने के लिए इस प्रकार की कार्यवाही न्याय संगत नहीं है।
इसके विरोध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा की तरफ से आज विद्युत नियामक आयोग में एक लोकमत प्रस्ताव दाखिल कर तत्काल पूरे मामले पर रोक लगाने की मांग उठाई गई।
पावर कॉरपोरेशन जो सभी उपभोक्ताओं का भार बढ़ा रहा है वह लगभग 3654 मेगावाट है। UPPCL उपभोक्ताओं का भार तो बढ़ा रहा है, लेकिन अपने सिस्टम का भार कब बढ़ाएगा? आंकड़े खुद स्थिति स्पष्ट करते हैं—प्रदेश में 132 केवी के 480 सब-स्टेशन हैं जिनकी कुल क्षमता लगभग 69,529 एमवीए (करीब 6.25 करोड़ किलोवाट) है, जबकि उपभोक्ताओं का संयोजित भार लगभग 8.57 करोड़ किलोवाट तक पहुँच चुका है। ऐसे में जब सिस्टम क्षमता और वास्तविक मांग में इतना अंतर है, तो सवाल यह है कि विद्युत ढांचे का विस्तार उसी अनुपात में कब किया जाएगा?”
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) से प्रदेश के लगभग 46,79,450 विद्युत उपभोक्ताओं का बिना पूर्व सूचना, बिना सहमति एवं बिना व्यक्तिगत नोटिस के विद्युत भार (लोड) बढ़ाए जाने के मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए कार्रवाई पर रोक लगाने तथा पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने बिलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से लाखों उपभोक्ताओं का स्वीकृत भार बढ़ा दिया, जबकि प्रभावित उपभोक्ताओं को यह नहीं बताया गया कि किन-किन तिथियों पर उनका भार निर्धारित सीमा से अधिक दर्ज हुआ, भार वृद्धि का आधार क्या था तथा उन्हें अपनी आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर भी नहीं दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों एवं उपभोक्ता अधिकारों के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि Electricity Supply Code, 2005 (संशोधित) में स्पष्ट प्रावधान है कि किसी भी उपभोक्ता का स्वीकृत भार बढ़ाने से पूर्व उसे कम से कम एक माह पहले नोटिस देना अनिवार्य है, ताकि वह अपना पक्ष प्रस्तुत कर सके। इसके बावजूद लाखों उपभोक्ताओं का भार सीधे बिलिंग सॉफ्टवेयर में संशोधित कर दिया गया।
परिषद ने यह भी कहा कि जिन उपभोक्ताओं का भार बढ़ाया गया है, उनमें लगभग 50 प्रतिशत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता शामिल हैं। जबकि स्मार्ट मीटरों की गुणवत्ता एवं रीडिंग की शुद्धता को लेकर पहले से गंभीर सवाल उठ रहे हैं और बड़ी संख्या में उपभोक्ता अधिक खपत तथा तकनीकी त्रुटियों की शिकायतें कर रहे हैं। ऐसे में स्मार्ट मीटर के आंकड़ों के आधार पर भार बढ़ाना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
परिषद ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 13,39,827, मध्यांचल में 12,58,363, पश्चिमांचल में 10,14,908, दक्षिणांचल में 9,60,148 तथा केस्को क्षेत्र में 1,06,214 उपभोक्ताओं का भार बढ़ाया गया है। इस प्रकार कुल लगभग 46,79,450 उपभोक्ता इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं।
परिषद ने कहा कि इस कार्रवाई का सीधा प्रभाव उपभोक्ताओं के फिक्स्ड चार्ज, न्यूनतम देय राशि एवं भविष्य के बिजली बिलों पर पड़ेगा, जिससे करोड़ों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं पर आएगा।
परिषद ने इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पक्ष बताते हुए कहा कि लाखों वाणिज्यिक (कॉमर्शियल) उपभोक्ताओं का विद्युत भार बढ़ा दिया गया, लेकिन विद्युत सुरक्षा विभाग से आवश्यक नई एनओसी (NOC) प्राप्त नहीं की गई। नियमानुसार भार बढ़ने पर नई एनओसी लेना अनिवार्य है। यदि भविष्य में किसी प्रकार की विद्युत दुर्घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह एक अत्यंत गंभीर प्रश्न है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग की है कि बिना सूचना बढ़ाए गए सभी विद्युत भार की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, प्रत्येक प्रभावित उपभोक्ता को भार वृद्धि का पूरा आधार उपलब्ध कराया जाए, आपत्ति एवं व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जाए तथा यदि कार्रवाई नियमों के विपरीत पाई जाए तो सभी बढ़े हुए भार तत्काल पूर्ववत किए जाएं। साथ ही आयोग इस पूरे प्रकरण में UPPCL से विस्तृत स्पष्टीकरण तलब करते हुए सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित करे।