पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त लेकिन ट्विस्ट ये था कि इन बेटियों को स्कूल का ब्लैकबोर्ड ही साफ नजर नहीं आ रहा था।
जब तक बेटियों की आँखों में विजन साफ नहीं होगा, तब तक वो देश की तरक्की का क्लाइमेक्स कैसे लिखेंगी नगर के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में एक नेत्र शिविर लगाया गया। यह सिर्फ एक मेडिकल कैंप नहीं था, बल्कि उन बेटियों की जिंदगी की स्क्रिप्ट बदलने वाला इंटरवल' था, जो दूर-दराज
के गाँवों से आकर अपने सपनों की जंग लड़ रही हैं।
द साइलेंट विलेन।

धुंधलापन और वो मासूम मुस्कान।

हर फिल्म में एक विलेन होता है, और यहाँ विलेन था धुंधलापन। कुछ मासूम बेटियाँ ब्लैकबोर्ड के धुंधले अक्षरों से हार रही थीं, पढ़ाई की रेस में पीछे छूट रही थीं। लेकिन तभी एंट्री होती है हमारे रियल-लाइफ हीरोज डॉक्टर्स की
जैसे ही डॉक्टर साहब ने बेहद प्यार और जादू की झप्पी वाले अंदाज में उनकी आँखें जाँचीं और दवा दी, बेटियों के चेहरों पर वैसी ही रौनक लौट आई जैसी थियेटर में लाइट जलने पर आती है। एक छात्रा ने अपनी आँखों में चमक और चेहरे पर 70 एमएम वाली मुस्कान बिखेरते हुए कहा अब पिक्चर साफ है, अब मुझे पढ़ने में कोई दिक्कत नहीं होगी!लापरवाही नहीं, देखभाल है जरूरी!"
इस पूरी कहानी के सबसे बड़े मार्गदर्शक और सीएचसी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. रवि शंकर शर्मा ने मंच संभाला तो उनका अंदाज किसी दमदार फिल्म के लीड एक्टर जैसा था। उन्होंने छात्राओं और स्टाफ के दिलों को छूते हुए एक ऐसा डायलॉग दिया, जो सीधा दिल पर लगा बेटियाँ हमारे समाज का असली उजाला हैं! अक्सर पढ़ाई के प्रेशर में ये बच्चियां अपनी तकलीफ छुपा जाती हैं। याद रखना, आँखों की एक छोटी सी ढील, इनके बड़े-बड़े सपनों को 'फ्लॉप' कर सकती है। हरी सब्जियां खाओ, विटामिन लो और अंधता जैसी बड़ी समस्या को 'द एंड' कर दो।

एक्शन हीरो की तरह एंट्री: 45 बेटियों का फुल-ऑन चेकअप

सीन में आगे बढ़े तो हमारे एक्शन हीरो नेत्र परीक्षण अधिकारी जसवीर कुमार ने मोर्चा संभाला। उन्होंने पूरी संजीदगी के साथ एक-एक करके 45 छात्राओं की आँखों का चेकअप किया साथ ही कमजोर नजर वाले विलेन की छुट्टी हो गई।
जिन बेटियों की नजर कमजोर थी, उन्हें मौके पर ही मुफ्त दवाइयां चश्मे दिये गये । इससे मिला जिंदगी की जंग जीतने का नया हौसला!
स्कूल की गाँवों की मिट्टी से निकलकर आसमान छूने का ख्वाब देखने वाली इन बच्चियों को जब डॉक्टरों का ऐसा 'फरिश्तों' जैसा साथ मिला, तो उनके चेहरों की राहत देखने लायक थी। वरदान से कम नहीं थी।