सिम्स के एमबीबीएस छात्रों ने किया गाजियाबाद जल शोधन संयंत्र का शैक्षणिक भ्रमण, सुरक्षित पेयजल व्यवस्था को समझा

हापुड़। सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सिम्स), अनवरपुर के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा एमबीबीएस तृतीय वर्ष (बैच-2023) के विद्यार्थियों के लिए 30 जून से 3 जुलाई 2026 तक गाजियाबाद स्थित जल शोधन संयंत्र का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। चार दिवसीय कार्यक्रम में करीब 250 विद्यार्थियों ने विभिन्न बैचों में भाग लेकर सुरक्षित पेयजल की शुद्धिकरण प्रक्रिया और जनस्वास्थ्य प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की।

यह भ्रमण कम्पीटेंसी बेस्ड मेडिकल एजुकेशन (CBME) पाठ्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने कच्चे पानी के संग्रहण से लेकर एरेशन, कोएगुलेशन, फ्लोकुलेशन, अवसादन, निस्पंदन, क्लोरीनीकरण, जल गुणवत्ता परीक्षण, भंडारण तथा उपभोक्ताओं तक सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित गुणवत्ता परीक्षण और वैज्ञानिक निगरानी के माध्यम से पेयजल को निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित रखा जाता है।

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने जलजनित रोगों की रोकथाम, पर्यावरणीय स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियंत्रण, जल गुणवत्ता निगरानी तथा समुदाय में सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता के महत्व को भी व्यवहारिक रूप से समझा। यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए कक्षा में अर्जित सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ।
सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. (ब्रिगेडियर) विनीत रस्तोगी ने कहा कि एक सक्षम चिकित्सक के लिए केवल रोगों का उपचार जानना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोगों की रोकथाम, स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित पेयजल और जनस्वास्थ्य व्यवस्था की गहन समझ भी आवश्यक है। ऐसे शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में व्यवहारिक ज्ञान, विश्लेषणात्मक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करते हैं।
भ्रमण में विभाग के संकाय सदस्य, वरिष्ठ रेजिडेंट एवं स्नातकोत्तर रेजिडेंट भी विद्यार्थियों के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. (ब्रिगेडियर) विनीत रस्तोगी ने संस्थान के चेयरमैन डॉ. जे. रामचन्द्रन एवं वाइस चेयरपर्सन रम्या रामचन्द्रन की ओर से जल शोधन संयंत्र के जूनियर इंजीनियर तनवीर मिर्ज़ा, इमैनुअल राणा तथा अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनके सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
संस्थान ने बताया कि भविष्य में भी विद्यार्थियों को व्यवहारिक चिकित्सा शिक्षा एवं जनस्वास्थ्य प्रणालियों से जोड़ने के उद्देश्य से ऐसे अनुभवात्मक शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, ताकि वे समाज के प्रति संवेदनशील, सक्षम और उत्तरदायी चिकित्सक बन सकें।