योगी सरकार ने सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में एक अहम फैसला लेते हुए शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलने को मंजूरी दे दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में जलालाबाद का नया नाम ‘परशुराम पुरी’ किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई।
सरकार के इस फैसले के साथ कई वर्षों से चल रही नाम परिवर्तन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि इस संबंध में स्थानीय निकाय स्तर पर प्रस्ताव पहली बार मार्च 2018 में पारित किया गया था।
लंबे समय से चल रही थी नाम बदलने की प्रक्रिया
जानकारी के मुताबिक, शाहजहांपुर नगर पालिका परिषद ने मार्च 2018 और बाद में सितंबर 2023 में हुई बोर्ड बैठकों में जलालाबाद का नाम बदलकर ‘परशुराम पुरी’ करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद तत्कालीन जिला प्रशासन ने अपनी संस्तुति के साथ प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा।
राज्य सरकार ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर प्रस्ताव केंद्र सरकार को अग्रसारित किया था। केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद अब यूपी कैबिनेट ने इसे औपचारिक स्वीकृति दे दी है।
भगवान परशुराम की जन्मस्थली माने जाने का दावा
स्थानीय मान्यताओं और पौराणिक संदर्भों के आधार पर जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मभूमि माना जाता है। कस्बे में स्थित प्राचीन परशुराम मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2022 में इस क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर ‘परशुराम जन्मभूमि’ के रूप में भी मान्यता दी गई थी। माना जाता है कि यहां मौजूद धार्मिक स्थल का इतिहास काफी प्राचीन है।
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के बीच जलालाबाद नाम को लेकर अलग-अलग मत हैं। कुछ लोगों का मानना है कि मुगल शासक जलालुद्दीन अकबर के सम्मान में इस क्षेत्र का नाम जलालाबाद रखा गया था।