संतकबीरनगर। मिंजनिब जमीयत उलमा-ए-हिन्द, जनपद संतकबीरनगर द्वारा गुरुवार को जामिया इस्लामिया दारुल उलूम, खलीलाबाद में एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का गरिमामय एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। प्रातः 8:00 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए जिम्मेदार पदाधिकारियों, उलेमा-ए-किराम एवं कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए संगठन की भावी कार्ययोजना और सामाजिक दायित्वों पर गंभीर मंथन किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को और अधिक सशक्त बनाना, जिम्मेदारों में नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा शिक्षा, सेवा, भाईचारा, सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुँचाना रहा। कार्यक्रम में संगठन की कार्यप्रणाली, सामाजिक उत्तरदायित्व, बदलते समय की चुनौतियों तथा जनहित के विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का संचालन एवं संयोजन मौलाना मोहम्मद शाहिद कासमी (जिला सचिव, जमीयत उलमा-ए-हिन्द, संतकबीरनगर) ने किया, जबकि अध्यक्षता मुफ्ती वसीम अहमद कासमी (जिला अध्यक्ष) ने की।
इस अवसर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के सद्र हजरत मौलाना हाफिज अब्दुल हई मिफ्ताही मुख्य अतिथि तथा जमीयत उलमा-ए-हिन्द उत्तर प्रदेश के महासचिव हजरत मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द का मूल उद्देश्य केवल धार्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण, संविधान के प्रति निष्ठा, सामाजिक सद्भाव, शिक्षा का प्रसार, मानव सेवा और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि सच्चा देशप्रेम वही है जो समाज में अमन, भाईचारा, आपसी विश्वास और इंसानियत को मजबूत करे। भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब हमारी सबसे बड़ी पहचान है और सभी धर्मों का सम्मान करते हुए प्रेम, सहयोग और मित्रतापूर्ण व्यवहार के साथ मिल-जुलकर रहना ही देश की असली ताकत है। वक्ताओं ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे समाज में नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत, संवाद और सकारात्मक सोच का संदेश लेकर जाएँ तथा हर वर्ग के लोगों के साथ समान सम्मान और सहयोग की भावना से कार्य करें।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक शिक्षा, सामाजिक सेवा, आपदा राहत, राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और इंसानियत की भलाई के लिए निरंतर कार्य करती रही है। संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता का दायित्व है कि वह समाज के कमजोर, जरूरतमंद और वंचित वर्ग तक सेवा की भावना के साथ पहुँचे तथा देश की तरक्की और सामाजिक सौहार्द को मजबूत बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए।
कार्यशाला में संगठनात्मक अनुशासन, जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन, आपसी समन्वय, नेतृत्व विकास एवं भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अंत में सभी प्रतिभागियों ने देशप्रेम, राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सद्भाव, मानव सेवा, सभी धर्मों के सम्मान तथा आपसी भाईचारे को मजबूत बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।
यह जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला केवल संगठनात्मक प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज में शांति, एकता, भाईचारा, राष्ट्रीय एकजुटता और इंसानियत की सेवा का सशक्त संदेश देकर एक सकारात्मक एवं प्रेरणादायी पहल के रूप में स्थापित हुई।