लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा मार्च 2026 में स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज के बाद निर्धारित 2 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल न किए जाने का मामला लोकमहत्व प्रस्ताव के माध्यम से उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) के समक्ष उठाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लेकर सुनवाई की।
आयोग का ऐतिहासिक फैसला
आयोग की दो सदस्यीय पीठ ने 3 जून 2026 को ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए पाया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के अनेक मामलों में रिचार्ज के बाद निर्धारित 2 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई, जो UPERC (Standards of Performance) Regulations, 2019 का स्पष्ट उल्लंघन है।
UPPCL पर ₹7.18 लाख की पेनल्टी
आयोग ने इस गंभीर लापरवाही पर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर ₹7,18,000 (सात लाख अठारह हजार रुपये) की पेनल्टी लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया था कि यह राशि 15 दिनों के भीतर आयोग में जमा की जाए। ऊर्जा क्षेत्र में किसी राज्य विद्युत नियामक आयोग द्वारा किसी विद्युत वितरण कंपनी पर उपभोक्ता सेवा मानकों के उल्लंघन के मामले में यह अब तक की सबसे बड़ी पेनल्टी मानी जा रही है।
पेनल्टी जमा न करने पर आयोग की फटकार
निर्धारित 15 दिनों की समय-सीमा बीत जाने के बावजूद UPPCL ने आयोग में पेनल्टी की राशि जमा नहीं की। इस पर आज हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए UPPCL प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाई। आयोग ने कहा कि नियामक आयोग के आदेशों की अवहेलना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
MD और चेयरमैन को अंतिम चेतावनी
आयोग ने UPPCL के प्रबंध निदेशक (MD) एवं चेयरमैन को निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर हर हाल में पेनल्टी की राशि आयोग में जमा कराई जाए, अन्यथा उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ता परिषद ने फैसले का स्वागत किया
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं देश की सर्वोच्च सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग का यह रुख उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और बिजली कंपनियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि नियामक आयोग के आदेशों का पालन कराने में ही लापरवाही होगी तो उपभोक्ताओं का विश्वास प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि UPPCL द्वारा आयोग के स्पष्ट आदेश के बावजूद समय पर पेनल्टी जमा न करना अत्यंत गंभीर विषय है। आयोग को इस पूरे मामले से उत्तर प्रदेश सरकार को भी अवगत कराना चाहिए ताकि UPPCL प्रबंधन की जवाबदेही तय हो सके। उन्होंने कहा कि UPPCL लगातार उपभोक्ताओं के मामलों में नियमों के विपरीत कार्यवाही करता रहा है और आयोग के आदेशों की भी अनदेखी कर रहा है। ऐसे में दोषी अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक है।
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग का यह प्रकरण प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि उपभोक्ता सेवा मानकों के उल्लंघन तथा आयोग के आदेशों की अवहेलना किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।