मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संभल दौरे के दौरान दिए गए बयान को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार समुदाय विशेष को निशाना बना रही है। वहीं, सहारनपुर में आयोजित जनसभा के दौरान AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्यमंत्री के बयान पर तीखा पलटवार किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी का चुनावी प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में ओवैसी लगातार सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद और संभल जैसे जिलों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। AIMIM की कोशिश मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने और समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में जगह बनाने की मानी जा रही है।
हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में AIMIM कोई सीट जीतने में सफल नहीं रही थी, लेकिन निकाय चुनावों में पार्टी ने कई स्थानों पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। इसके साथ ही कई सीटों पर विपक्षी वोटों के बंटवारे को लेकर भी पार्टी चर्चा में रही।
फिलहाल, योगी आदित्यनाथ और असदुद्दीन ओवैसी के बीच तेज होती जुबानी जंग ने प्रदेश की सियासत को गर्मा दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोटों की राजनीति और विपक्षी वोटों के बंटवारे का मुद्दा चुनावी बहस का प्रमुख केंद्र बन सकता है।अगर यह न्यूज ऐप के लिए है, तो मैं इसे 45–60 सेकंड की एंकर कॉपी या मोबाइल-फ्रेंडली शॉर्ट फॉर्मेट में भी तैयार कर सकता हूँ।