नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के लिए बनाई गई स्थायी शैक्षणिक पहचान संख्या Automated Permanent Academic Account Registry, APAAR ID को लेकर अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि APAAR ID बनवाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए और छात्रों तथा उनके अभिभावकों को इसे बनवाने या न बनवाने का स्पष्ट विकल्प मिलना चाहिए।
CBSE को डेटा प्राइवेसी की जांच के निर्देश
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को निर्देश जारी करेगा कि APAAR ID से जुड़े डेटा प्राइवेसी (निजता) के पहलुओं की जांच सुनिश्चित की जाए। अदालत ने इस मुद्दे को छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना।
ओडिशा हाई कोर्ट के फैसले का पालन करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कहा कि वह ओडिशा हाई कोर्ट के उस आदेश का पालन करे, जिसमें APAAR ID को पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) बताया गया था। अदालत ने दोहराया कि किसी भी छात्र या अभिभावक पर APAAR ID बनवाने का दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
सहमति फॉर्म में 'हाँ' के साथ 'नहीं' का भी विकल्प जरूरी
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि APAAR ID के लिए इस्तेमाल होने वाले सहमति (Consent) फॉर्म में केवल "हाँ" का विकल्प नहीं होना चाहिए। उसमें "नहीं (No)" का भी स्पष्ट विकल्प दिया जाए, ताकि छात्र और उनके माता-पिता बिना किसी दबाव के अपना निर्णय ले सकें।
जल्द जारी होगा औपचारिक आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में वह जल्द ही अपना औपचारिक आदेश जारी करेगा, जिसमें APAAR ID से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश शामिल होंगे।
क्या है APAAR ID?
APAAR ID केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी' पहल का हिस्सा है। यह प्रत्येक छात्र के लिए एक स्थायी डिजिटल शैक्षणिक पहचान है, जिसके माध्यम से उसके शैक्षणिक रिकॉर्ड, प्रमाणपत्र, उपलब्धियां और अन्य शैक्षणिक दस्तावेज डिजिटल रूप से सुरक्षित रखे जाते हैं। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों की सुविधा और रिकॉर्ड प्रबंधन को आसान बनाने के लिए बनाई गई है।
डेटा सुरक्षा को लेकर उठते रहे हैं सवाल
हालांकि APAAR ID को डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, लेकिन डेटा सुरक्षा, निजता और व्यक्तिगत जानकारी के संरक्षण को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की सहमति और उनकी निजता की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।