नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blended Petrol) की सीमा 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। सरकार ने कहा कि भविष्य में यदि इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है, तो वह व्यापक वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन तथा सभी संबंधित हितधारकों से परामर्श के बाद ही लिया जाएगा।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि E20 कोई नया ईंधन नहीं है, बल्कि भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 में ही हो चुकी थी।
मंत्री ने बताया कि सरकार ने चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाई है। वर्ष 2013-14 में यह औसतन 1.53 प्रतिशत थी, जिसे लगातार प्रयासों के बाद 2025-26 में 20 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचाया गया है।
सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने का उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, 20 प्रतिशत से अधिक इथेनॉल मिश्रण को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि इथेनॉल मिश्रण की सीमा बढ़ाने पर विचार किया जाता है, तो उससे पहले वाहन तकनीक, इंजन की अनुकूलता, ईंधन की गुणवत्ता, पर्यावरणीय प्रभाव और अन्य वैज्ञानिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद ही सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श कर कोई निर्णय लिया जाएगा।