नई दिल्ली: देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपद येसो नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि 30 जून 2026 तक भारत की कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़कर 288 गीगावाट से अधिक हो गई है। वर्ष 2014 में यह क्षमता केवल 76 गीगावाट थी, यानी पिछले एक दशक में इसमें लगभग चार गुना वृद्धि दर्ज की गई है।

मंत्री के अनुसार, वर्तमान में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 162 गीगावाट से अधिक है, जो नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके अलावा पवन ऊर्जा की क्षमता लगभग 58 गीगावाट, जल विद्युत की क्षमता 57 गीगावाट और जैव ऊर्जा की क्षमता 11 गीगावाट से अधिक है।

श्रीपद येसो नाइक ने बताया कि वित्त वर्ष 2013-14 से वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में लगभग 46 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्राप्त हुआ है। यह निवेश देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इसी अवधि में 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों तथा प्रमुख घरेलू वित्तीय संस्थानों—भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी लिमिटेड (IREDA), पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC), इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (IIFCL), नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट (NaBFID) और स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (SIDBI)—ने नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है।

सरकार का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तेज़ वृद्धि और लगातार बढ़ता निवेश भारत को स्वच्छ, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा प्रणाली की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है।