बखिरा/लेडुआ महुआ, संतकबीरनगर।
जब किसी गांव का बेटा अपनी प्रतिभा और अथक मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाकर स्वदेश लौटता है, तो वह केवल अपने परिवार ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन जाता है। ऐसा ही गौरवपूर्ण क्षण उस समय देखने को मिला, जब नगर पंचायत बखिरा के लेडुआ महुआ निवासी युवा वैज्ञानिक डॉ. इरशाद अहमद अमेरिका से अपने गृह क्षेत्र पहुंचे। उनकी स्वदेश वापसी पर जगह-जगह फूल-मालाओं, बुके और जोरदार नारों के बीच भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। पूरे क्षेत्र में खुशी, उत्साह और सम्मान का माहौल देखने को मिला।
स्वागत समारोह के दौरान डॉ. इरशाद अहमद ने अत्यंत विनम्रता के साथ अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपने माता-पिता की दुआओं, परिवार के अटूट सहयोग, गुरुजनों के मार्गदर्शन, ईश्वर पर अटूट विश्वास और निरंतर कठिन परिश्रम को दिया। उन्होंने कहा कि "सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरा करने का हौसला और मेहनत दोनों हो। यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और इरादे मजबूत हों, तो दुनिया की कोई मंजिल दूर नहीं रहती।"
डॉ. इरशाद अहमद की शैक्षिक यात्रा संघर्ष, समर्पण और सफलता की प्रेरक कहानी है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मदरसा दारुल उलूम तनवीरुल इस्लाम, अमरडोभा से प्राप्त की। इसके बाद चिश्तिया जूनियर हाईस्कूल, अमरडोभा से जूनियर शिक्षा तथा बनी माधव गोपीनाथ इंटर कॉलेज, बखिरा से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से स्नातक और जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से मास्टर डिग्री एवं पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
विज्ञान और शोध के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा प्रतिष्ठित "यंग साइंटिस्ट अवार्ड" से सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2023 में उन्हें अमेरिका के प्रतिष्ठित ब्राउन कैंसर सेंटर, स्कूल ऑफ मेडिसिन, यूनिवर्सिटी ऑफ लुइसविल (केंटकी) में पोस्ट डॉक्टोरल साइंटिस्ट के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जहां उन्होंने चिकित्सा एवं वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
युवाओं को प्रेरित करते हुए डॉ. इरशाद अहमद ने कहा कि "जीवन में सफलता पाने के लिए लक्ष्य तय करें, समय का सम्मान करें, कठिन परिश्रम को अपना साथी बनाएं और कभी भी असफलताओं से घबराएं नहीं।" उन्होंने कहा कि उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा कुरआन की आयत "इन्नल्लाह मअस्साबिरीन" है, जिसका अर्थ है— "निस्संदेह, अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।"
क्षेत्रवासियों ने कहा कि डॉ. इरशाद अहमद ने अपनी मेहनत, प्रतिभा और लगन से न केवल अपने माता-पिता का सपना साकार किया, बल्कि पूरे संतकबीरनगर का नाम राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोशन किया है। उनकी सफलता आज क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए उम्मीद, प्रेरणा और आत्मविश्वास की नई मिसाल बन चुकी है।
इस अवसर पर गड्डू भाई, मोहम्मद अहमद, शकील अहमद, अबू उबैदा, वसी अहमद, शमीम अहमद, डॉ. एम.एम. अंसारी, कारी निसार अहमद, वसीम अहमद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. इरशाद अहमद को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।