संभल: उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में पुलिस और प्रशासन का सख्त रुख लगातार जारी है। हिंसा के प्रमुख आरोपियों पर कार्रवाई करते हुए अब एक और आरोपी मोहम्मद वारिस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारिस को हिंसा के प्रमुख आरोपियों में शामिल माना गया है। इससे पहले इसी मामले में उसके दो सहयोगियों पर भी रासुका लगाया जा चुका है। अब तक इस मामले में तीन प्रमुख आरोपियों के खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई हो चुकी है।पुलिस के अनुसार, मोहम्मद वारिस पर हिंसा भड़काने, हथियार उपलब्ध कराने और हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप हैं। पुलिस का दावा है कि वारिस फरार गैंगस्टर शारिक साठा का करीबी है। शारिक साठा फिलहाल दुबई में छिपा हुआ बताया जा रहा है और उसकी गिरफ्तारी के लिए रेड कॉर्नर नोटिस तथा लुकआउट नोटिस जारी किया जा चुका है।इससे पहले अक्टूबर 2025 में वारिस के कथित सहयोगी मुल्ला अफरोज और गुलाम पर भी NSA के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस का कहना है कि ये तीनों आरोपी गैंगस्टर शारिक साठा के नेटवर्क से जुड़े हैं।
क्या था संभल हिंसा का मामला?
संभल में 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद के सर्वे का विरोध करते हुए हिंसा भड़क गई थी। पुलिस के अनुसार, पथराव और फायरिंग की घटनाओं में चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हुए थे।इस मामले में संभल कोतवाली और नखासा थाने में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें 2,750 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि, जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कुछ लोगों के नाम चार्जशीट से हटा दिए गए।
SIT रिपोर्ट से पहले बढ़ी कार्रवाई की अहमियत
सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में संभल हिंसा मामले की विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट सदन में पेश की जानी है। ऐसे में रिपोर्ट से पहले प्रमुख आरोपियों पर NSA के तहत की गई कार्रवाई को प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।