मेरठ, 23 जुलाई। ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में हुए शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन के दौरान अनुसूचित जाति (एससी) समाज के युवकों पर दर्ज मुकदमों के विरोध में गुरुवार को एससी अधिवक्ता संघ, मेरठ (उत्तर प्रदेश) के पदाधिकारियों एवं अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी मेरठ के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में जिला कार्यालय मेरठ पर एससी समाज के युवक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन कर रहे थे। इसके बावजूद पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर आठ युवकों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
संघ ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान माननीय एसीजेएम-10, मेरठ ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 307, 109 एवं 110 को लागू न पाए जाने पर उन्हें विलोपित कर दिया तथा सभी आठ अभियुक्तों की जमानत स्वीकार कर ली। इसके बाद सभी युवकों की रिहाई हो चुकी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इससे स्पष्ट होता है कि मामले में गंभीर धाराएं लगाने के संबंध में निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
एससी अधिवक्ता संघ ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि पूरे प्रकरण की किसी सक्षम एवं स्वतंत्र एजेंसी अथवा वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही, पक्षपातपूर्ण कार्रवाई अथवा अधिकारों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो उसके विरुद्ध विधिसम्मत एवं कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों में भाग लेने वाले निर्दोष व्यक्तियों के विरुद्ध अनावश्यक कानूनी कार्रवाई रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं तथा न्याय, निष्पक्षता और विधि के शासन को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए।
इस अवसर पर एससी अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष एडवोकेट सतीश कुमार राजवाल, महामंत्री एडवोकेट रजनीश खजूरी, मनोज कुमार फतेउल्लापुर (पदाधिकारी, एससी अधिवक्ता संघ) सहित संघ के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि संगठन संविधान, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है तथा न्याय मिलने तक संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।