नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर सख्ती की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। नीट पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए चार राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार संबंधित राज्यों और उच्च न्यायालयों को पत्र लिखेगी, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो और दोषियों को शीघ्र सजा मिल सके।
सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और युवाओं का भरोसा बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। दरअसल, मौजूदा नीट पेपर लीक मामले में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत चार मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले औरंगाबाद, नागपुर, कोलकाता और जबलपुर से जुड़े हैं। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, जबकि अन्य मामले कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में हैं।
इन सभी मामलों की सुनवाई के लिए प्राथमिकता के आधार पर फास्ट ट्रैक अदालतें गठित करने का प्रस्ताव है। यह कानून 21 जून 2024 से लागू है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम पांच वर्ष की सजा, जिसे बढ़ाकर दस वर्ष तक किया जा सकता है, और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस कानून के दायरे में यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती बोर्ड, आईबीपीएस, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए, केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाएं तथा केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य सार्वजनिक परीक्षाएं शामिल हैं।
चूंकि नीट परीक्षा एनटीए आयोजित करता है, इसलिए इससे जुड़े पेपर लीक के मामले भी इसी कानून के तहत दर्ज किए गए हैं। सरकार की योजना है कि इन फास्ट ट्रैक अदालतों में रोजाना सुनवाई हो, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आए तथा दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। सरकार का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत होगी और लाखों अभ्यर्थियों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और बढ़ेगा।