लखनऊ। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल द्वारा समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस (पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसिंग) व्यवस्था को उपभोक्ता हितों और प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताए जाने के बाद उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसका कड़ा विरोध किया है। परिषद का कहना है कि बिजली वितरण नेटवर्क उपभोक्ताओं के धन से तैयार हुआ है, इसलिए इसका निजी कंपनियों के हित में उपयोग स्वीकार्य नहीं है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) की सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि परिषद ने विद्युत अधिनियम-2003 में प्रस्तावित संशोधनों पर ऊर्जा सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान भी इस व्यवस्था का संवैधानिक आधार पर विरोध दर्ज कराया था। उनका कहना है कि बिजली वितरण प्रणाली की तुलना दूरसंचार नेटवर्क से नहीं की जा सकती, क्योंकि दोनों क्षेत्रों की संरचना और संचालन पूरी तरह अलग हैं।
उन्होंने कहा कि बिजली वितरण नेटवर्क, जिसमें खंभे, लाइनें, ट्रांसफॉर्मर और उपकेंद्र शामिल हैं, उपभोक्ताओं से वर्षों से बिजली दरों के माध्यम से वसूले गए धन से विकसित किया गया है। ऐसे में इन परिसंपत्तियों का उपयोग निजी वितरण कंपनियों को उपलब्ध कराना उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ होगा।
अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार उत्तर प्रदेश की सभी विद्युत वितरण कंपनियों की परिसंपत्तियों का वर्तमान मूल्य करीब ₹1.83 लाख करोड़ (₹1,82,995 करोड़) है। उन्होंने सवाल उठाया कि उपभोक्ताओं के धन से निर्मित इन परिसंपत्तियों का उपयोग निजी कंपनियां किस आधार पर करेंगी और इससे आम बिजली उपभोक्ताओं को क्या प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में अडानी समूह ने नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में समानांतर वितरण लाइसेंस के लिए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) में आवेदन किया था, जो अभी विचाराधीन है। इस मामले में उपभोक्ता परिषद आयोग के समक्ष आपत्तिकर्ता के रूप में उपभोक्ताओं का पक्ष रख रही है।
परिषद का कहना है कि यदि केंद्र सरकार प्रस्तावित व्यवस्था लागू करती है तो इसका सबसे अधिक लाभ बड़े निजी उद्योग समूहों को मिलेगा, जबकि सरकारी वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसका अंतिम बोझ बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका भी जताई गई है।
अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि परिषद बिजली क्षेत्र में सुधारों के खिलाफ नहीं है, लेकिन ऐसे सुधारों का समर्थन करती है जो पारदर्शी, संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप और उपभोक्ता हितों की रक्षा करने वाले हों। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपभोक्ताओं द्वारा वित्तपोषित वितरण परिसंपत्तियों का निजी हितों के लिए उपयोग किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद इस प्रस्ताव का संवैधानिक, कानूनी और जनहित के हर मंच पर विरोध जारी रखेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर नियामक आयोगों से लेकर न्यायालय तक उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।