मेरठ उत्तर प्रदेश
नदियों में ढूंढ, पहाड़ों में ढूंढ, बहते झरनों, हवाओं में ढूंढ,
जा अब नहीं आता, अब तू ही मुझे ढूंढ ।।
शहर की सड़कों, गाँवो की पगडंडी में ढूंढ, पहाड़ों के मौन, झरनों के शोर में ढूंढ,
जा अब नहीं आता, अब तू ही मुझे ढूंढ ।।
चिड़ियों के गीत, तितलियों के रंग, फूलों की खुशबू, और फिजाओं में ढूंढ,
जा अब नहीं आता, अब तू ही मुझे ढूंढ ।।
नदियों की धार, समंदर की लहर में ढूंढ, ये खुला आसमान, सारे जहान में ढूंढ,
जा अब नहीं आता, अब तू ही मुझे ढूंढ ।।
अमावस की रात, पूनम के चांद में ढूंढ, मेघ की गरज और बिजली की चमक में ढूंढ,
जा अब नहीं आता, अब तू ही मुझे ढूंढ ।।
बारिश की बूंद, मिट्टी की खुशबू में ढूंढ, तुझमें मिलूंगा मैं झाँक खुद में और अपने मौन में ढूंढ,
जा अब नहीं आता, अब तू ही मुझे ढूंढ ।।
लेखक- कुमार सचिन वर्मा जो