लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर योजना को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में बिजली व्यवस्था की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा ओवर बिलिंग और स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतों पर नाराजगी जताए जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने भी इस परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिषद ने योजना की उच्चस्तरीय जांच कर इसे तत्काल रोकने की मांग की है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री द्वारा उपभोक्ता हितों को लेकर दिखाई गई गंभीरता का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से सामने आ रही हैं। ओवर बिलिंग, तकनीकी खामियों और उपभोक्ताओं की लगातार शिकायतों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की आरडीएसएस (RDSS) योजना के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के लिए लगभग ₹18,885 करोड़ की मंजूरी दी गई थी, जबकि उत्तर प्रदेश में इस परियोजना का टेंडर करीब ₹27,342 करोड़ में जारी किया गया। इसके अलावा कार्यदायी संस्थाओं की मांग पर परफॉर्मेंस बैंक गारंटी भी 10 प्रतिशत से घटाकर 3 प्रतिशत कर दी गई, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं की शिकायतें कम होने के बजाय लगातार बढ़ रही हैं।
अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि स्मार्ट मीटर योजना प्रदेश के बिजली क्षेत्र और उपभोक्ताओं, दोनों के लिए लाभकारी साबित नहीं हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा कर इसे तत्काल रोका जाए और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जाए।उन्होंने यह भी कहा कि ओवर बिलिंग के मामलों में केवल औपचारिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास बहाल हो सके।उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार से मांग की है कि बिजली उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए स्मार्ट मीटर व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।