नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया है। इस विधेयक के माध्यम से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन कर सजा, जुर्माने और जांच प्रक्रिया को और अधिक कठोर बनाने का प्रस्ताव किया गया है।
विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ाना तथा परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले व्यक्तियों, संगठित गिरोहों और संस्थानों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
परीक्षा धोखाधड़ी पर बढ़ेगी सजा और जुर्माना
विधेयक के अनुसार, परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा को बढ़ाया गया है। अब ऐसे मामलों में कम से कम 5 साल से अधिकतम 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
परीक्षा संचालन से जुड़े सेवा प्रदाताओं पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। दोषी पाए जाने वाले सेवा प्रदाताओं पर 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा और उन्हें 8 साल तक किसी भी सार्वजनिक परीक्षा की जिम्मेदारी से प्रतिबंधित किया जा सकेगा।
यदि किसी कंपनी के निदेशक, वरिष्ठ प्रबंधन या जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है, तो उन्हें कम से कम 5 साल की जेल और 5 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।
संगठित परीक्षा अपराध पर होगी कड़ी कार्रवाई
विधेयक में संगठित परीक्षा अपराधों के लिए भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। संगठित गिरोह, परीक्षा प्राधिकरण या संस्थान द्वारा अपराध किए जाने पर कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
जांच के लिए STF और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान
विधेयक में गंभीर मामलों की जांच के लिए केंद्र सरकार को विशेष कार्यबल (Special Task Force) गठित करने का अधिकार देने का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अधिकार दिया जाएगा।
इन अदालतों में मामलों की सुनवाई रोजाना आधार पर की जाएगी और चार्जशीट दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
समयबद्ध जांच और विशेष लोक अभियोजक की नियुक्ति
विधेयक के तहत परीक्षा अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करना अनिवार्य होगा। मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए प्रत्येक स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक (Special Public Prosecutor)नियुक्त किए जाएंगे।
अपील की नई व्यवस्था
स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ अपील सीधे हाईकोर्ट में की जा सकेगी। ऐसी अपीलों की सुनवाई हाईकोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ करेगी और उन्हें तीन महीने के भीतर निपटाने का प्रयास किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह संशोधन सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखने, पेपर लीक और परीक्षा माफिया पर रोक लगाने तथा छात्रों के हितों की रक्षा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।