*बिना संस्कार के लड़के और लड़कियां* संस्कार का मतलब सिर्फ "नमस्ते करना" या "बड़ों के पैर छूना" नहीं है। संस्कार का असली मतलब है - *अच्छा इंसान बनना, सही-गलत की पहचान होना, और समाज में इज्जत से रहना*।आज हम देखते हैं कि कई लड़के-लड़कियां पढ़े-लिखे, स्मार्ट और टैलेंटेड होने के बाद भी "बिना संस्कार" के कहलाते हैं। आखिर ऐसा क्यों
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