जब कॉपियों के पन्नों में मुस्कुराया रजपुरा का बचपन।शिक्षा का उजाला लेकर पहुंची मानव उत्थान सेवा समिति।
परीक्षितगढ़ माता अमृता के जन्मोत्सव पर 128 नन्हें हाथों को मिली सपनों की चाबी, भर आईं सबकी आंखें...कहते हैं अगर नीयत में सच्चाई हो, तो कागज़ के एक टुकड़े पर खींची गई रेखा भी किसी की तकदीर बदल सकती है। गुरुवार को रजपुरा के प्राथमिक विद्यालय का मैदान एक ऐसे ही जादू का गवाह बना, जहाँ गरीबी की धूल में
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