प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए नोटों से भरे तीन ड्रम मिलने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इन ड्रमों में 500-500 रुपये के नोटों की गड्डियां भरी हुई थीं। शुरुआती दावों के मुताबिक, बरामद नकदी पांच करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। हालांकि, कैश की कुल रकम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस ने नकदी को कब्जे में लेकर सील कर दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामला जिला मुख्यालय से करीब 32 किलोमीटर दूर नवाबगंज थाना क्षेत्र के बरईपुर रामनगर गांव का बताया जा रहा है। यहां राकेश यादव के घर पर पुलिस की कार्रवाई के दौरान जमीन में दबाकर रखे गए तीन ड्रम बरामद हुए। ड्रमों में बड़ी संख्या में नोटों की गड्डियां मिलने की खबर से इलाके में चर्चा तेज हो गई है।
घर से लेकर बाग और खाली जमीन तक पुलिस की निगरानी
बताया जा रहा है कि नकदी बरामद होने के बाद पुलिस ने घर को अपने घेरे में ले लिया। घर के आसपास 40 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा घर से सटे बाग और खाली जमीन को भी घेरकर तलाशी और जांच की जा रही है।
पुलिस ने राकेश यादव के भाई बबलू को भी हिरासत में लिया है। जानकारी के मुताबिक, परिवार के अन्य सदस्यों को भी पूछताछ के लिए पुलिस अपने साथ ले गई है। हालांकि, इस कार्रवाई में किसकी क्या भूमिका है, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
पड़ोसियों से विवाद के बाद शुरू हुई जांच
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस की छापेमारी से करीब पांच से छह दिन पहले राकेश यादव का पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों से विवाद हुआ था। इस मामले में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है।
बताया जाता है कि शिकायत की जांच के सिलसिले में थाने के एक दरोगा गांव पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस और राकेश यादव के बीच कहासुनी हुई। इसके बाद पुलिस ने मामले की पड़ताल तेज की और कथित तौर पर घर में बड़ी मात्रा में नकदी छिपाकर रखे जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि, नकदी बरामदगी और पहले दर्ज विवाद के बीच संबंध क्या है, इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पुणे में काम से लेकर करोड़ों की संपत्ति तक की चर्चा
राकेश यादव के बारे में सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, वह कई साल पहले पुणे में अपने बहनोई और साले के साथ रहकर एक सर्राफा कारोबारी के यहां काम करता था। कोरोना महामारी के दौरान वह गांव लौट आया था।
इसके बाद उसके नाम से करीब 22 बीघा जमीन खरीदने की बात कही जा रही है, जिसकी कीमत लगभग 10 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। इसके अलावा करीब एक करोड़ रुपये की लागत से मकान बनवाने, दो ट्रैक्टर खरीदने और डीजे व पिकअप वाहन रखने की जानकारी भी सामने आई है। बताया जाता है कि वह गांव में सीमेंट और सरिया का कारोबार भी करता था।
हालांकि, संपत्ति, कारोबार और उसकी आय से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में इन जानकारियों को जांच के निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
अब नकदी के स्रोत का पता लगाएगी पुलिस
जमीन के नीचे दबे तीन ड्रमों से इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पैसा कहां से आया और इसे जमीन में छिपाकर क्यों रखा गया था। पुलिस की पूछताछ और जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
फिलहाल, बरामद नकदी की सटीक राशि, उसके स्रोत और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों पर आधिकारिक खुलासा होना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि करोड़ों रुपये की इस कथित बरामदगी के पीछे की असल कहानी क्या है।