पट्टी, प्रतापगढ़।

अरनब साइक्लोन के असर से मौसम में आए बदलाव ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रातभर चले तेज तूफान और मूसलाधार बारिश के चलते क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की खड़ी फसल खेतों में गिरकर बिछ गई है। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।

खेतों में पककर तैयार होने के कगार पर खड़ी धान की फसल तेज हवाओं और बारिश का दबाव सहन नहीं कर सकी। देखते ही देखते लहलहाती फसल जमीन पर गिर गई। वहीं लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भरने और गिरी हुई फसल के भीगकर जमीन पर पड़े रहने से उसके सड़ने और दाने खराब होने की आशंका बढ़ गई है।

अशोक प्रजापति, बसीर अहमद सहित दर्जनों किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार करने में खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी पर काफी लागत लगाई गई थी। अब कटाई के समय मौसम की मार ने उनकी उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है। फसल बर्बाद होने की आशंका से किसान बेहद निराश और परेशान हैं।

किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर फसल नुकसान का आकलन कराने तथा उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है, ताकि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित अन्नदाताओं को राहत मिल सके।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौसम की इस मार से बेहाल किसानों को आखिर कब तक राहत मिलेगी और उनकी मेहनत की भरपाई कौन करेगा?