नई दिल्ली/ढाका: बांग्लादेश में बढ़ती धार्मिक कट्टरता, भीड़ की हिंसा और सांप्रदायिक भेदभाव के खिलाफ विभिन्न धार्मिक समुदायों, सांस्कृतिक संगठनों और धर्मनिरपेक्ष सोच वाले नागरिकों ने संयुक्त कार्रवाई का आह्वान किया है। राजधानी ढाका के नेशनल प्रेस क्लब में 'बांग्लादेश ऑफ हार्मनी' शीर्षक से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयोजकों ने सरकार और समाज के सामने 10 सूत्रीय मांगें रखीं।
क्या हैं प्रमुख मांगें
आयोजकों ने धार्मिक हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष जांच, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थानों की सुरक्षा, सभी नागरिकों को समान अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, बाउल-फकीर और सूफी परंपराओं के संरक्षण, ऐतिहासिक दरगाहों की सुरक्षा और संपत्ति विवादों के समाधान की भी मांग की गई।
आयोजकों ने यह भी अपील की कि उर्स, मेलों, पूजा, संगीत कार्यक्रमों और खेल आयोजनों पर किसी भी तरह के भेदभावपूर्ण या अनावश्यक प्रतिबंध न लगाए जाएं।
तीन चरणों में चलेगा आंदोलन
कार्यक्रम की घोषणा करते हुए आयोजकों ने बताया कि अभियान तीन चरणों में आगे बढ़ेगा:
- 3 से 5 नवंबर: देश के सभी 64 जिलों में उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
- 13 नवंबर: मानव श्रृंखला बनाई जाएगी और मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
- 20 नवंबर: ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार से मैमनसिंह तक लॉन्ग मार्च आयोजित होगा।
अभियान का उद्देश्य
आयोजकों के अनुसार, इस पहल का मकसद देश में सद्भाव, समान अधिकार और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करना है। उनका कहना है कि बांग्ला समाज की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की रक्षा के लिए सभी वर्गों का एकजुट होना जरूरी है।