लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल के बीच चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के मामले में प्रशासनिक सख्ती बढ़ा दी है। अब वोटर लिस्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी, लापरवाही या आवेदनों के निस्तारण में अनावश्यक देरी होने पर सीधे जिला निर्वाचन अधिकारी यानी जिलाधिकारी (DM) की जवाबदेही तय होगी। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिलाधिकारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग का साफ संदेश है कि मतदाता सूची से जुड़े काम में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

रोज़ ECI-NET पर लॉगिन करेंगे DM

निर्देशों के मुताबिक, अब सभी DM को खुद हर दिन ECI-NET ऐप पर लॉगिन करना होगा और अपने जिले में मतदाता सूची से जुड़े कामकाज की नियमित समीक्षा करनी होगी। अब तक कई स्तरों पर अधिकारियों के ज़रिए निगरानी होती थी, लेकिन अब DM की सीधी निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।

नए नाम जोड़ने, नाम हटाने और मौजूदा विवरण में सुधार से जुड़े मामलों को समय पर निपटाने को कहा गया है। इसके लिए फॉर्म-6, 6A, 7 और 8 के लंबित आवेदनों की नियमित जांच करनी होगी:

  • फॉर्म-6: नए मतदाता का पंजीकरण
  • फॉर्म-6A: विदेश में रहने वाले भारतीय मतदाताओं का पंजीकरण
  • फॉर्म-7: नाम हटाने या किसी प्रविष्टि पर आपत्ति
  • फॉर्म-8: नाम-पते में सुधार या अन्य ज़रूरी बदलाव

आईडी-पासवर्ड साझा किया तो होगी कार्रवाई

आयोग ने मतदाता सूची के काम में लगे अधिकारियों को हिदायत दी है कि वे अपनी लॉगिन आईडी, पासवर्ड और OTP किसी दूसरे व्यक्ति से साझा न करें। ऐसी शिकायत मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।

इसके अलावा DM को अपने जिले के उप जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (AERO), BLO सुपरवाइज़र और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की प्रोफाइल जांचने को कहा गया है। सभी के नाम, मोबाइल नंबर, पदनाम और फोटो सही होने चाहिए। अधिकारियों ने आखिरी बार कब लॉगिन किया, यह जानकारी भी रोज़ देखनी होगी।

BLO की कॉल 48 घंटे से ज़्यादा लंबित नहीं

आम मतदाताओं की सुविधा के लिए आयोग ने 'बुक ए कॉल विद BLO' सुविधा पर भी विशेष ज़ोर दिया है। इसके तहत मतदाता अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी से संपर्क के लिए कॉल रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। निर्देश है कि ऐसी कोई भी रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए।

शिकायतों की रोज़ होगी समीक्षा

राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (NGSP) और अन्य माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों की DM को प्रतिदिन समीक्षा करनी होगी। लंबित मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के साथ उनके जवाबों की गुणवत्ता भी जांची जाएगी। DM खुद या किसी वरिष्ठ अधिकारी के ज़रिए शिकायत निस्तारण का सैंपल परीक्षण कराएंगे।

मतदाता सूची लोकतांत्रिक व्यवस्था का बेहद अहम हिस्सा है। किसी योग्य मतदाता का नाम छूटना या गलत जानकारी दर्ज होना उसके मतदान के अधिकार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में आयोग की इस सख्ती का मकसद मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और अपडेट रखना है। अब देखना होगा कि ज़िलों में इन निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से होता है।