अयोध्या। दीपोत्सव के दसवें संस्करण में इस बार सरयू नदी के 56 घाटों पर 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि देश-दुनिया में बैठे रामभक्त डिजिटल माध्यम से भी अपनी आस्था के दीप अयोध्या में समर्पित कर सकेंगे। इसके लिए डिजिटल धार्मिक प्लेटफॉर्म 'श्री मंदिर' ने एक लाख दीप प्रज्ज्वलित कराने की पहल की है। इससे वे श्रद्धालु भी आयोजन से जुड़ सकेंगे, जो किसी कारणवश अयोध्या नहीं पहुंच पाते।

लगातार पांचवें वर्ष डिजिटल सहभागिता

आयोजन से देश-दुनिया के कई बड़े संस्थान जुड़ रहे हैं। इसी क्रम में लगातार पांचवें वर्ष 'श्री मंदिर' के सहयोग से अयोध्या के ऐतिहासिक राजद्वार में एक लाख दीप जलाने की योजना है। श्रद्धालु देश या विदेश में कहीं से भी अपने नाम से प्रभु श्रीराम के चरणों में दीप समर्पित करा सकेंगे।

कैसे होगा दीप अर्पण?

श्रद्धालु एक, पांच, ग्यारह या इक्कीस दीप अर्पित करने का विकल्प चुन सकेंगे। राजद्वार में मौजूद पुरोहित श्रद्धालु के नाम और गोत्र से विधिवत संकल्प लेकर दीप प्रज्ज्वलित करेंगे। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाएगी, जिसे बाद में डिजिटल माध्यम से संबंधित श्रद्धालु को भेजा जाएगा। इससे दूरदराज़ और विदेश में रहने वाले भक्त भी अपने नाम से हुआ दीप अर्पण देख सकेंगे।

अखंड रामायण पाठ और महाअन्नदान भी

दीप प्रज्ज्वलन के साथ-साथ धार्मिक और सेवा गतिविधियां भी होंगी। इनमें अखंड रामायण पाठ, विद्वान आचार्यों व ब्राह्मणों की सेवा और पांच हज़ार से अधिक साधु-संतों, श्रद्धालुओं व ज़रूरतमंदों के लिए महाअन्नदान शामिल है। इनका आयोजन भी 'श्री मंदिर' की ओर से किया जाएगा।

"दूरी आस्था के आड़े न आए"

'श्री मंदिर' के संस्थापक एवं CEO प्रशांत सचान ने कहा कि श्रद्धालु की आस्था और उसके आराध्य के तीर्थस्थल के बीच भौगोलिक दूरी बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में दीपोत्सव और भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों की सराहना की और इस आयोजन में सहयोगी बनना अपने लिए सौभाग्य बताया। उनका प्रयास है कि दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले रामभक्त का संकल्प अयोध्या तक पहुंचे और उसके नाम से विधि-विधान से दीप जले।

परंपरा और तकनीक का संगम

डिजिटल दीप अर्पण की यह व्यवस्था खासतौर पर बुज़ुर्ग, अस्वस्थ और विदेश में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी होगी। इस तरह दीपोत्सव-2026 केवल दीपों की जगमगाहट तक सीमित न रहकर तकनीक के माध्यम से देश-दुनिया के रामभक्तों को अयोध्या की आस्था और परंपरा से जोड़ने का माध्यम भी बनेगा।